पेगासस क्या है?

पेगासस क्या है? पेगासस मामला और विवादों में भारत सरकार

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दुनिया भर में पेगासस चर्चा का विषय बना हुआ है। दरअसल हाल ही में दो विश्व प्रमुख और प्रतिष्ठित संस्थानों – फोरबिडेन स्टोरीज, और एम्नेस्टी इंटरनेशनल को 50,000 यूजर्स का डाटा प्राप्त हुआ है।

इस डाटा की पड़ताल के लिए दोनो संस्थानों ने विश्व की 16 प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के पत्रकारों का एक ग्रुप बनाया जिसमें दा गार्डियन, वॉशिंगटन पोस्ट, रेडियो फ्रांस, द वायर जैसे मीडिया संस्थानों के प्रतिष्ठित पत्रकारों और रिपोर्ट को शामिल किया गया। इस ऑपरेशन को पेगासस प्रोजेक्ट का नाम दिया गया।

प्रोजेक्ट की रिर्पोट के अनुसार भारत, सऊदी अरब, मोरक्को, संयुक्त अरब अमीरात, मैक्सिको, बहरीन जैसे 40 देशों की जासूसी कराए जाने संबंधी रिपोर्ट प्रस्तुत की गई है। हालांकि अभी लक्षित सभी व्यक्तियों के नामों की पुष्टि नहीं की जा सकी है।

इस मामले को और समझने से पहले आइए पहले यह जानने की कोशिश करते है की यह पेगासस है क्या, पेगासस कब और कैसे बना, पेगासस को कौन चला सकता है, यह कैसे काम करता है, इत्यादि तरह की संपूर्ण जानकारी।

पेगासस - जासूसी करने का अधिकार
पेगासस – जासूसी करने का अधिकार

पेगासस स्पाइवेयर क्या है

पेगसस का मतलब / शाब्दिक अर्थ है : उड़ने वाला घोड़ा।

पेगासस स्पाइवेयर इजराइली सुरक्षा कम्पनी NSO ग्रुप द्वारा बनाया गया एक सॉफ्टवेयर है। NSO ग्रुप के अनुसार इसका विकास आतंकवाद और और अपराध से लड़ने में सरकार की मदद करने के लिए किया गया है।

पेगासस कैसे काम करता है

साइबर एक्सपर्ट की रिपोर्ट के अनुसार, लक्षित व्यक्ति को करप्ट फाइल, मैसेज, या लिंक भेजकर उसकी डिवाइस को हैक कर लिया जाता है, और डिवाइस का पूर्ण कंट्रोल एजेंसी को प्रदान कर दिया जाता है।

2016 के मुकाबले पेगासस का अपडेटेड वर्जन अधिक सुविधाएं प्रदान करता है। इस समय पेगसस से कोई भी डिवाइस हैक करने के लिए लिंक या एसएमएस की भी जरूरत नहीं होती है।

व्हाट्सएप कॉल के जरिए भी डिवाइस को हैक किया जा सकता है, चाहे काल रिसीव हो अन्यथा नहीं।

पेगासस vs अन्य मैलवेयर

मालवेयर या स्पाइवेयर एक तरह के सॉफ्टवेयर होते हैं जो किसी भी डिवाइस की टैपिंग/हैक या स्पाइन करने के काम आते है।

अभी तक कई स्पाइवेयर/मैलवेयर सॉफ्टवेयर विकसित किए जा चुके हैं। इन सॉफ्टवेयर की सहायता से किसी की बातचीत या सामान्य जानकारी भी जुटाई जा सकती है।

पेगासस स्पाइवेयर अन्य स्पाइवेयर से कन्ही “अधिक जानकारी” में सेंध लगाने की क्षमता रखता है। यह कॉल डिटेल्स, कैमरा, ईमेल, माइक्रोफोन, गैलरी जैसे महत्वपूर्ण जानकारी पे नजर रख सकता है।

पेगासस में एक्टिव कलेक्शन फीचर है जो फोन को किसी भी समय अपनी जरूरत के हिसाब से उपयोग कर सकता है। किसी भी समय आपका माइक्रोफोन, कैमरा, वीडियो रिकॉर्डिंग जैसी चीज कंट्रोल कर सकता है।

कैसे पता करे पेगासस फोन में है या नही !

पेगासस एंड्रॉयड और आईओएस दोनो फोन में हो सकता है। यह जानने के लिए की पेगासस फोन में या नहीं अभी तक कोई तकनीक विकसित नही हुई है।

दरसल, पेगासस फोन में एंटर करने के लिए किस तकनीक का उपयोग करता है यह बात अभी तक किसी भी फोन निर्माता कंपनी की समझ के परे है।

इस बात की गंभीरता इस बात से भी नजर आती है की अपनी सिक्योरिटी के मशहूर iphone भी पेगासस स्पाइवेयर से सुरक्षित नहीं है।

अगर पेगासस फोन में है तो क्या करे ?

पहली बात तो ये है कि – पेगासस फोन में है या नही यह निर्धारित ही नहीं किया जा सकता है, किंतु अगर किसी तरह इस बात का निर्धारण कर भी लिया जाए तो इसे हटाया नही जा सकता है।

हालांकि पेगासस में सेल्फ डिस्ट्रिक्ट की सुविधा है, यह किसी भी तरह की जांच में सामने आने से पहले ही खुद को नष्ट कर लेता है।

कौन चला सकता है पेगासस

NSO ग्रुप के अनुसार, इस स्पाइवेयर को आतंकवाद और अपराध को कम करने और उससे लड़ने में मदद करने के लिए बनाया गया है।

इस स्पाइवेयर का उपयोग केवल और केवल सरकार या सरकारी संस्थान ही कर सकते है। यह स्पाइवेयर किसी भी प्राइवेट व्यक्ति या संस्था को नही दिया जाएगा।

यह सॉफ्टवेयर अभी तक किन कम्पनी या देशों को बेचा गया है इसका खुलासा करने से NSO ग्रुप ने इंकार कर दिया है। हालांकि एक रिपोर्ट के अनुसार यह सॉफ्टवेयर अभी तक 40 देशों को बेचा जा चुका है।

पेगासस और भारत

फॉरबिडेन स्टोरीज और एमनेस्टी इंटरनेशनल द्वारा रिपोर्ट के बाद भारत सरकार पर देश में कई लोगो की जांच कराए जाने के आरोप लगाए जा रहे है। जिसका विरोध प्रदर्शन संसद भवन से सड़को तक दिखाई दे रहा है।

रिपोर्ट में दी गई जानकारी के अनुसार, भारत में लगभग 300 लोगो की जासूसी कराई जा रही थी। जिसमे 40 पत्रकार, 2 मंत्री, 2 विपक्ष के नेता, समेत समाज सेवी संस्थाएं, न्यायाधीश, सिविल एक्टिविस्ट,और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के लोग भी शामिल होने की संभावना है।

हालांकि यह इस संबंध में सरकार ने अब तक कोई भी जिम्मेदारी नहीं ली है और सरकार का कहना है की “देश में लॉ फुल इंटरसेप्शन की एक पूर्ण प्रक्रिया है जिसका आवश्यकता पड़ने पर उपयोग किया जाता रहा है।”

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पेगासस पर सवाल क्यों

हाल ही में जारी रिपोर्ट के अनुसार, भारत में कई ऐसे स्वतंत्र पत्रकारों, संस्थाओं के भी स्पाइन की बात सामने आई है, जो सरकार और उनकी योजनाओं की कड़ी आलोचना करते रहे है।

इसलिए इस तरह का कदम प्रेस की स्वतंत्रता के लिए खतरा माना जा रहा है।

क्या भारत सरकार के पास यह अधिकार है की वह किसी भी व्यक्ति की टैपिंग या स्पाइन करा सके ?

पेगासस पर सवाल
पेगासस पर सवाल

अगर भारत सरकार के पास यह अधिकार है तो क्या भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 का उलंघन नही हो रहा है? ऐसे है सवालों पर संसद में विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है।

पेगासस और भारतीय जासूसी कानून

भारत सरकार को भारतीय संविधान के द्वारा कुछ शर्तो के साथ किसी भी व्यक्ति, संस्था की जासूसी करने का अधिकार प्राप्त है।

भारत सरकार को भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम 1885, और IT ACT 2000, के द्वारा यह अधिकार है की यदि मामला राज्य सुरक्षा, भारत की अखंडता और संप्रभुता, और विदेशी राज्य के साथ संबंधों जैसे गंभीर मामले हैं तो गृह मंत्रालय या उच्च अधिकारी की सहमति से जासूसी की जा सकती है।

किसी भी व्यक्ति या संस्था की जासूसी अधिकतम 60 दिन या विशेष परिस्थिति में 180 दिन तक की जा सकती है।

भारत में किन कंपनी को है सर्विलांस का अधिकार

भारत में किसी की जासूसी करने का संवैधानिक अधिकार केवल 10 कंपनियों को है जो निम्न है।

  1. इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB)
  2. नारकोटिक कंट्रोल ब्यूरो (NCB)
  3. प्रवर्तन निदेशालय (ED)
  4. क्राइम ब्रांच इन्वेटिगेशन (CBI)
  5. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT)
  6. राजस्व आसूचना निदेशालय (DRI)
  7. रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW)
  8. एनआईए
  9. डीएसआई
  10. डीपीसी

उक्त 10 सरकारी एजेंसियों को ही किसी विशेष परिस्थिति में जासूसी करने का अधिकार है। हालांकि अखंडता और संप्रभुता ही ऐसे शब्द है जिनका दायरा बहुत बड़ा है।

राहत की बात

गौरतलब है की हाल ही में Report Without Border की World Press Freedom Index 2021 में भारत 180 देशों में 142 वें पायदान पर था जो यह प्रदर्शित करता है की, भारतीय प्रेस की स्वतंत्रता और गोपनीयता में और सुधार किए जाने की जरूरत है।

भारत का मौजूदा इंटरसेप्शन तंत्र लचीला है जिससे कानून के दुरुपयोग की भरपूर संभावना व्यक्त की जा सकती है।

निगरानी से जुड़े सिस्टम में सुधार की आवश्कता है, यदि किसी की निगरानी की जाए तो कब ,क्यों, और कितनी को अधिक स्पष्ट करने की अवश्यकता है।

न्यायपालिका या किसी अन्य सिस्टम द्वारा निरीक्षण की व्यवस्था भी की जानी चाहिए।

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