सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती संस्थानों की लिए दिशा निर्देश और डिजिटल मीडिया अचार संहिता) 2021

सूचना प्रौद्योगिकी नियम – 2021 और सोशल मिडिया के बढ़ते दुरूपयोग के मामले।

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डिजिटल मीडिया की अपारदर्शिता, गैरजवाबदेही ,और उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा को लेकर बढ़ीं हुई चिंताओं के कारण, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 87 (2) का उपयोग करते हुए पूर्व सूचना प्रौद्योगिकी नियम 2011 के स्थान पर, सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती संस्थानों की लिए दिशा निर्देश और डिजिटल मीडिया अचार संहिता) 2021 तैयार किया गया है।

डिजिटल इंडिया ने प्रद्योगिकी के सहारे आम भारतीयों को सशक्त बनाया है। मोबाइल फोन, इंटरनेट, आदि के व्यापक इस्तेमाल ने कई सोशल मीडिया प्लेटफार्मों को भी भारत में एक बेहतर बाजार उपलब्ध कराया है।

कुछ रिपोर्टों के अनुसार भारत में सोशल मीडिया यूजर्स की संख्या निम्न है:

  • Whatsapp user: 53 करोड़
  • Youtube user: 48.8 करोड़
  • Facebook user: 41 करोड़
  • Instagram user: 21 करोड़
  • Twitter user: 1.75 करोड़

इन सोशल मीडिया प्लेटफार्म ने यूजर्स को अपनी रचनात्मकता दिखाने, अपने विचारो को प्रकट करने, सवाल पूछने, सरकार एवं समाज के समर्थन या विरोध को प्रकट करने जैसे बहुत सारे कामों को करने के लिए एक प्लेटफार्म दिया है।

भारत दुनिया के समस्त सोशल मीडिया प्लेटफार्म के लिए सबसे बड़ा खुला इंटरनेट का बाजार है। साथ ही भारत सरकार भी इन सोशल मीडिया कंपनियों का खुले दिल से भारत में व्यापार करने का अवसर भी प्रदान करती है, बशर्ते की वो भारत के कानून और संविधान का पूर्णतः पालन करे।

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सोशल मीडिया और उपयोगकर्ता

हाल में सोशल मीडिया पर कई आपत्तिजनक घटनाएं देखी गई जैसे फर्जी खबरों का लगतार प्रसार, महिलाओं की तस्वीर के साथ छेड़छाड़, बदले की भावना में महिलाओं के अश्लील वीडियो शेयर करने जैसी घटनाओं ने महिलाओ की गरिमा को खतरे में डाल दिया है।

इन प्लेटफार्मों के उपयोग से अपमानजनक भाषा, अनर्गल और अश्लील सामग्री का प्रसार, धार्मिक भावनाओं के खिलाफ अपमानजनक विचार, राष्ट्र विरोधी विचार, अशहिष्णुता, वित्तीय धोखाधड़ी, हिंसा भड़काना जैसे कई आसामाजिक और अपराधिक घटनाएं हो रही हैं।

कुछ प्लेटफार्मों ने इन मुद्दों से प्रभावित होकर तथ्य जांच केंद्र स्थापित किए हैं किंतु पारदर्शिता और मजबूत शिकायत तंत्र की अनुपस्थिति के कारण उपयोगकर्ता को कम्पनी के नियमानुसार संतुष्ट होना पड़ता है।

सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती संस्थानों की लिए दिशा निर्देश और डिजिटल मीडिया अचार संहिता) 2021 की तर्क संगतता

सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती संस्थानों की लिए दिशा निर्देश और डिजिटल मीडिया अचार संहिता) 2021, उपकोगकर्ताओ के अधिकारों के उल्लंघन के मामलो में शिकायत के निपटान और इसके प्रति जवाबदेही तय करने को पर्याप्त सशक्त बनाते है।

इस दिशा मे, इलेक्ट्रानिक्स और सूचना प्रद्योगिकी मंत्रालय ने प्रारूप तैयार किया और 24 दिसंबर 2018 को लोगो के सुझाव आमंत्रित किए। एमईआईटीवाई को कुल 171 सुझाव प्राप्त हुए। इन सुझावों के आधार पर तथा एक अंतर मंत्रालयी बैठक के बाद सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती संस्थानों की लिए दिशा निर्देश और डिजिटल मीडिया अचार संहिता) 2021, को मूर्त रूप दिया गया।


इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा दिए गए दिशा निर्देश

सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती संस्थानों की लिए दिशा निर्देश और डिजिटल मीडिया अचार संहिता) 2021 के नए नियमों में मध्यस्थो (सोशल मीडिया और ओटीटी प्लेटफार्म) को उपयोगकर्ताओं की संख्या के आधार पर दो भागो में विभाजित किया गया है। नियमों के तहत प्रमुख मध्यस्थों (सोशल मीडिया और ओटीटी प्लेटफार्म) को कुछ अतिरिक्त जांच परख का भी पालन करना होगा।

1. मुख्य अनुपालन अधिकारी की नियुक्ति

मधयस्थों द्वारा एक अनुपालन अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी जो भारत का नागरिक होना चाहिए। अनुपालन अधिकारी अधिनियम और नियमों के साथ अनुपालन करने के लिए जवाबदेह होगा।

2. नोडल संपर्क अधिकारी की नियुक्ति

प्रत्येक मध्यस्थ कम्पनी को एक नोडल संपर्क अधिकारी की नियुक्ति करनी होगी, जो भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ 24*7 समन्वय में रहेगा। ऐसा व्यक्ति भारत का निवासी होना चाहिए।

3. रेजिडेंट शिकायत अधिकारी की नियुक्ति

प्रत्येक कंपनी को शिकायत निवारण तंत्र की जवाबदेही के लिए रेजिडेंट शिकायत अधिकारी की नियुक्ति करनी होगी तथा ऐसा व्यक्ति भारत का निवासी होना चाहिए।

4. मासिक अनुपालन रिपोर्ट

एक मासिक अनुपालन रिपोर्ट का प्रकाशन करना होगा, जिसमे महीने भर में मिलने वाली शिकायत और शिकायतो पर की गई कार्यवाही साथ ही साथ हटाए गए कंटेंट का विवरण भी प्रस्तुत करना होगा।

5. प्रकाशक की पहचान

किसी भी प्रकार के असंवैधानिक तत्व जैसे बलात्कार, यौन उत्पीडन, भारत की संप्रभुता, अखंडता, देश की सुरक्षा संबंधित सामग्री के प्रथम प्रकाशक की जानकारी साझा करनी होगी।

6. पक्ष रखने का अवसर

ऐसे उपयोगकर्ता, जिनकी दी हुई किसी जानकारी को मध्यस्थों ने हटा दिया है या छुपा दिया है तो उपयोगकर्ता को पूरा अधिकार होगा की वह की गई कार्यवाही का आधार और वजह की जानकारी विस्तार पूर्वक मांग सकता है और उपयोगकर्ता को अपना पक्ष रखने का पूर्ण भी पूर्ण अधिकार होगा।

7. असंवैधानिक जानकारी को हटाना

ऐसी कोई भी जानकारी जो भारत की एकता, अखंडता, और साम्प्रदायिकता को प्रभावित करता हो, या किसी कानून, आदेश को असंप्रदायिक बनाकर प्रस्तुत किया है तो उसे तुरंत हटाना होगा ।

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डिजिटल मीडिया आचार संहिता

डिजिटल मीडिया प्लेटफार्म आचार संहिता लागू करने सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती संस्थानों की लिए दिशा निर्देश और डिजिटल मीडिया अचार संहिता) 2021 के तहत सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को अधिकार दिया गया है, की वह सूचनाा प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत डिजिटल प्लेटफार्म्स और ओटीटी प्लेटफार्म्स को नियंत्रित कर सकती है।

सरकार, सिविल सोसायटी,और अभिवावको से भी सोशल मीडिया और ओटीटी प्लेटफार्म्स को लेकर कई शिकायत दर्ज हुई जिनमे उच्च न्यायालय, उच्चतम न्यायालय और अदालतों ने सरकार को उपयुक्त उपाय करने के सख्त निर्देश भी दिए थे।

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सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 87 के अंतर्गत भाग 3 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को नियमों को लागू करने के लिए अधिकार प्राप्त हैं। जिसमे निम्न सुझाव दिए हैं

1. ओटीटी प्लेटफार्म्स, ऑनलाइन समाचार, और डिजिटल मीडिया के लिए आचार संहिता

यह आचार संहिता सभी ऑनलाइन प्लेटफार्म द्वारा पालन किए जाने वाले दिशा निर्देशों का विवरण प्रस्तुत करती है।

2. कंटेंट का स्व-वर्गीकरण

ओटीटी प्लेटफार्म्स को कंटेंट को उम्र के आधार पर पांच भागो में वर्गीकृत करना होगा। यू , यू/ए 7+, यू/ए 13+, यू/ए 16+, ए (वयस्क)।

3. त्रि-स्तरीय शिकायत समाधान तंत्र

3.1 प्रकाशकों द्वारा स्वविनियमन – प्रकाशकों को एक शिकायत समाधान अधिकारी की नियुक्ति भारत में करनी होगी जो प्राप्त हुई शिकायतो के प्रति जवाबदेह होगा और 15 दिन के भीतर समाधान प्रस्तुत करेगा।

3.2 प्रकाशकों द्वारा स्ववियनियमित संस्थाओं का विनियमन – प्रकाशकों की कई स्व-विनयमित संस्थाएं होने पर उन्हें एक मुख्य संस्था बनानी होगी जिसके प्रमुख उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय के सेवा निवृत्त न्यायाधीश,या कोई प्रतिष्ठित व्यक्ति होगा जो प्रकाशकों द्वारा आचार संहिता के पालन के प्रति जवाबदेह होगी साथ ही उन समस्याओं का निराकरण भी करेगी जिनका 15 दिन के अंदर निराकरण संभव नहीं हो पाया है

3.3 निगरानी तंत्र – सूचना और प्रसारण मंत्रालय एक निगरानी तंत्र का विकाश करेगी जो आचार संहिता सहित स्ववियनयमित संस्थाओं के लिए एक चार्टर प्रकाशित करेगी साथ ही साथ अंतर मंत्रालयी समिति का गठन भी करेगी।

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