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ब्लैक फंगस (लक्षण और रोकथाम)

ब्लैक फंगस

ब्लैक फंगस

जैसा की वर्तमान समय में भारत में ब्लैक फंगस के मामलों के आंकड़ों में तेजी से वृद्धि हुई है जिसके कारण यह समस्या कई राज्यों (गुजरात, राजस्थान,पंजाब तेलंगाना, तमिलनाडु) में महामारी घोषित की जा चुकी है, और चर्चा का विषय भी रही है।

ब्लैक फंगस म्यूकर माइकोसिस (Mucor mycosis) नामक फफूंद के कारण फैलने वाला एक गंभीर और दुर्लभ फंगल संक्रमण है।

जनसामान्य की भाषा में इस ब्लैक फंगस के नाम से जाना जाता है, जिसमे यह फेफड़े और मस्तिष्क को प्रभावित करता है, जिससे पीड़ित व्यक्ति की मृत्यु तक हो जाती है।

यह संक्रमण मुख्यताः उन लोगो में देखा जा रहा है जो या तो Covid-19 से पीड़ित है, साथ ही साथ वह व्यक्ति जो उससे निजात पा चुके है। इस संक्रमण में मृत्यु दर 50-80% तक होती है।

ब्लैक फंगस के लक्षण

ICMR (भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान संस्थान) के वैज्ञानिकों के अनुसार ब्लैक फंगस के लक्षणों में मुख्यतः साइन साइरिस (नाक में रुकावट या कंजेशन), नाक से खून आना, गाल की हड्डी में दर्द होना,नाक पर कालापन, सिरदर्द, खून की उल्टी होना, खून का थक्का बनना, सीने में दर्द होना, आंखो में जलन, इत्यादि शामिल है।

यह फंगस मुख्यतः नाक से शुरु होकर उसके पश्चात् ,आंख और मस्तिष्क को प्रभावित करता है। अतः आंखो में जलन, धुंधलापन दिखाई देना, आंखो में लाल धब्बे होना भी लक्षण में शामिल किया गया है।

इसके कारण आंखो की रोशनी चली जाती है, या कुछ अंग काम करना बंद कर देते है।

क्यों होता है ब्लैक फंगस

ब्लैक फंगस संक्रमण कोई नया संक्रमण नहीं है, यह हमारे वातावरण में पहले भी मौजूद थे । वर्तमान समय में अचानक से संक्रमण के मामलो में वृद्धि दर्ज की गई।

म्युकर माइकोसिस ऐसा फफूंद है जो आम तौर पर वातावरण में पाया जाता है और इसका संचरण श्वास या पर्यावरण में मौजूद बिजानुओ के अंतर्ग्रहण के कारण होता है।

ब्लैक फंगस से प्रभावित होने का मुख्य कारण हमारी कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता है।

विशेषज्ञों के रिपोर्ट के अनुसार शरीर का बढ़ा हुआ स्टेराइड भी इसकी एक ठोस वजह बन सकता है।

Covid-19 के इलाज के दौरान रोगियों को स्टेराइयड की डोज दी जाती है जिससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी होती है और रोगी या तो Covid-19 के इलाज के दौरान या ठीक होने के पश्चात् भी ब्लैक फंगस (Mucor mycosis) के चपेट में आ जाते है।

भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान नई दिल्ली (AIIMS New Delhi) के डारेक्टर श्री रणदीप गुलेरिया के अनुसार जो मरीज कोरोना से पीड़ित है और वे मधुमेह (डायबिटीज) के मरीज हैं उन्हें स्टेरॉइड देते समय ऐहतियात बरतने की आवश्यकता है।

Covid -19, हाई शुगर लेवल, और स्टेरॉयड यदि ये तीनों चीजें किसी मरीज में मिल जाएं तो उसमें (म्यूकर माइकोसिस) की संभावना बहुत अधिक बढ़ जाती है।

Covid-19 के ऐसे मरीज जिनको इलाज के दौरान ऑक्सीजन सिलेडर (वेंटिलेटर) लगाया गया था उनको भी ब्लैक फंगस का खतरा होता है क्योंकि ऐसे में उपयोग होने वाले ह्यूमिडीफायर कैंटेनरों की सफाई में कमी से पाइप लाइन में फंगस की संद्रता बढ़ जाती है, जो संक्रमण का कारण बनती है।

यह मुख्य रूप से उन लोगो को प्रभावित करता है जो मधुमेह (डायबिटीज), आदि प्राकृतिक पर्यावरणीय रोगों से ग्रस्त है, या इलाज करा रहे है।

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ब्लैक फंगस के प्रभाव

Covid-19 के बाद अब म्यूकर मायकोसिस फंगस कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाली के लिए खतरा बना हुआ है।

ये फंगल इन्फेक्शन पहले साइनस (नाक में ऊपर की तरफ) में होता है, उसके 2 या 4 दिन बाद आंख तक पहुंच जाता है, इसके पश्चात् भी अगर इलाज नहीं मिला तो अगले 24 घंटे में मस्तिष्क तक पहुंच जाता है।

अगर फंगस को शुरुआती दौर में पहचान कर, समय रहते इलाज शुरू किया जाए तो बचा जा सकता है किंतु यदि इंफेक्शन आंख तक पहुंच चुका हो तो आंखे निकलनी पड़ जाती है जिससे मरीज को बचाया जा सके,अन्यथा रोगी की मृत्यु तक हो सकती है।

ब्लैक फंगस के उपचार

सर्वप्रथम यह फंगस उन लोगो को प्रभावित नही कर सकता जिनको स्टेरियड संबंधित या अन्य कोई बीमारी नहीं है।

वह व्यक्ति जो डायबिटीज रोगी हो या किसी अन्य तरीके से स्टेरायड के बड़े हुए लेवल से ग्रसित है तो अपना स्टेराइड लेवल रेगुलर चेक करते रहे और मेंटेन रखे। यदि इन्हेलर का प्रयोग कर रहे है तो उसके तुरंत बाद गर्म पानी या बीटाडीन का गरारा करे जिससे फंगल ग्रोथ नही हो।

स्टेराइड या शुगर लेवल मेंटेन करने में खान पान (डाइट) पर ध्यान देना भी जरूरी होता है। खाने में प्रोटीन की मात्रा बढ़ाकर साथ ही साथ कार्बोहाइड्रेट की मात्रा में कमी करके शुगर लेवल मेंटेन रखा जा सकता है।

पानी की मात्रा में कमी न होने दें।एक ही मास्क का उपयोग 3 हफ्ते से अधिक करने से बचे ।

शुरुआती लक्षण को नजरंदाज न करे, दिखते ही डॉक्टर से संपर्क करे, और इलाज कराए। क्योंकि अगर शुरुआती समय में इलाज किया जाए तो आसानी से ठीक किया जा सकता है।

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