Global Gender Gap Report 2021

Global Gender Gap Report 2021

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WORLD ECONOMIC FORUM (WEF) हर साल , Global Gender Gap Report जारी करता है। वर्ष 2021 में रिपोर्ट का 15वा संस्करण (Global Gender Gap Report 2021) विश्व आर्थिक मंच द्वारा प्रकाशित किया गया।

रिपोर्ट के प्रारंभिक साक्ष्य बताते हैं कि Covid-19 महामारी के कारण स्वास्थ्य आपातकाल और आर्थिक मंदी ने महिलाओं को पुरुषों की तुलना में अधिक गंभीर रूप से प्रभावित किया है।

WEF द्वारा जारी रिर्पोट में कुल 156 देशों को शामिल किया गया था। जिसमे लगातार 12 साल से आइसलैंड पहले पायदान पर बरकार है। यहां समानता का स्तर लगभग 90% है।

रिपोर्ट के अनुसार शीर्ष देशों में नार्दिक देशों ( फिनलैंड-2, नार्वे-3, न्यूजीलैंड-4 ,स्वीडन-5) का दबदबा हर साल की तरह इस साल भी बरकार रहा ।

विश्व में भारत की स्थिति

Global Gender Gap Report 2021 में 156 देशों में भारत 140 वे पायदान पर है। रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार भारत की स्थिति सुधारने के बजाय बद्तर हो गई है।

इसका अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है की वर्ष – 2020 में 153 देशों की तुलना में भारत 122 वे पायदान पर था जो इस वर्ष की अपेक्षा लगभग 28 पायदान ऊपर था।

दक्षिण एशियाई देशों की तुलना में भी भारत की स्थिति कुछ ज्यादा अच्छी नहीं थी । पाकिस्तान और अफगानिस्तान-156 वे को छोड़कर (बांग्लादेश -65, नेपाल-106, श्रीलंका-116, भूटान-130) बाकी पड़ोसी देशो की स्थिति भारत से अच्छी है।

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Gender Gap parameters

WEF द्वारा Gender Gap का आकलन मुख्यतः 4 पैरमीटर्स पर किया जाता है।

1.आर्थिक भागीदारी और अवसर में अंतर

भारत की अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी और मिलने वाले मौके (श्रम बाजार) केवल 22.3% और जेंडर गैप – 72% है।

COVID – 19 महामारी ने पुरुषो के मुकाबले महिलाओं के रोजगार पर ज्यादा असर डाला है। इस महामारी ने पुरुषो के रोजगार को 30% प्रभावित किया है ,वन्ही महिलाओं के रोजगार को 90% तक प्रभावित किया है। साथ ही साथ पुरुषो को नया रोजगार मिलना भी महिलाओं के मुकाबले 8 गुना ज्यादा आसान है।

2. राजनीतिक सशक्तिकरण

भारतीय राजनीति में महिलाओं के भागीदारी में 13.5% की गिरावट दर्ज की गई है। 2019 में जहाँ महिला मंत्रियों की प्रतिशत संख्या 23.1% थी वह 2021 में घटकर महज 9.1% रह गई है। संसद में महिलाओं की संख्या 14% जो जस की तस रही ।

3. शैक्षणिक स्थिति

लैंगिक साक्षरता के मामले में 17.6% पुरुषो की तुलना में एक तिहाई महिलाएं निरक्षर होती है।

4. महिलाओं के स्वास्थ्य और जीवित रहने की स्थिति

रिपोर्ट में महिलाओं के साथ भेदभाव की बात कही गई है, इस इंडेक्स में भारत निचले 5 देशों में शामिल है। लिंग आधारित सोच के कारण भी नवजात में भी लिंगानुपात में बड़ा अंतर सामने आया है।

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Global Gender Gap report 2020 में भारत की स्थिति के कारण

CMIE (Center for Monitoring Indian Economy) थिंक टैंक द्वारा जारी रिर्पोट के अनुसार, भारत में केवल 7% शहरी महिलाओं के पास रोजगार है।

इस बात की गंभीरता को इस बात से भी समझा जा सकता है कि इस मामले में भारत की स्थिति इंडोनेशिया और सऊदी अरब से भी खराब है। पितृसत्तात्मक समाज व्यवस्था हमेशा से लिंगानुपात का एक मुख्य कारण रहा है, और आज भी यह समाज व्यवस्था में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।

आज तक जब भी समाज में कोई अप्रत्याशित या सुनियोजित परिवर्तन होता है जैसे युद्ध, आपदा, या राजनीतिक तो उसका सबसे ज्यादा नकारात्मक प्रभाव महिलाओं पर ही देखा गया है।

COVID – 19 महामारी के कारण महिलाओं के मुख्यतः कार्य स्थल जैसे स्कूल, क्लिनिक, क्रेच आदि संस्थान पर असर होने से महिलाओं के रोजगार पर सीधा असर देखा गया है।

तेजी से बढ़ती भविष्य की नौकरियां (क्लाउड कम्प्यूटिंग, डाटा और AI ) में पुरुषो को तुलना में महिलाओं को संख्या बेहद कम है,

रिपोर्ट के अनुसार क्लाउड कम्प्यूटिंग में 14%, इंजीनियरिंग में 20%,और डाटा और AI के क्षेत्र में महज 32% ही महिलाओं का प्रतिनिधित्व है, जिस पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

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