रासुका क्या है? | What is NSA in Hindi - National Security Act

दिल्ली हिंसा मामले में पांच आरोपियों पर NSA दर्ज, जाने क्या है रासुका?

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दिल्ली: पुलिस आयुक्त राकेश अस्थाना ने मंगलवार को जहांगीरपुरी सांप्रदायिक हिंसा मामले में संलिप्त पांच आरोपियों के खिलाफ रासुका (NSA) के अंतर्गत मामला दर्ज करने का आदेश दिया।

बता दें कि कल केन्द्रीय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अस्थाना को आरोपियों के विरूद्ध सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे और कहा था की दंगाइयों पर एक उदाहरण स्थापित करने वाली कार्यवायी की जाये ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।

रासुका क्या है? | What is NSA in Hindi – National Security Act

राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (रासुका) 23 सितंबर 1980 को प्रख्यापित भारतीय संसद का एक अधिनियम है जिसका उद्देश्य “कुछ विशेष मामलों के लिए निवारक निरोध (Preventive Detention) प्रदान करना” है। यह अधिनियम पूरे भारत में फैला हुआ है। इसमें 18 खंड शामिल हैं

NSA कब लग सकता है?

यदि कोई पुलिस या प्रशासनिक अधिकारी इस बात से संतुष्ट हैं कि कोई व्यक्ति राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है या वह सार्वजनिक व्यवस्था को बाधित कर सकता है तो उस पर NSA के अंतर्गत कार्यवायी की जा सकती है।

रासुका या राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम एक ऐसा अधिनियम है जो सरकार को किसी व्यक्ति को हिरासत में लेने का अधिकार देता है।

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राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत मुख्य बिंदु

  1. अधिनियम के अंतर्गत किसी व्यक्ति को कई महीनों तक हिरासत में रखा जा सकता है
  2. रासुका के अंतर्गत राज्य या केंद्र सरकार किसी व्यक्ति को भारत की सुरक्षा के प्रतिकूल आचरण करने से रोक सकती है
  3. किसी व्यक्ति को हिरासत में लिया जा सकता है यदि वह विदेशों के साथ भारत के संबंधों के लिए खतरा है
  4. सार्वजनिक कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह अधिनियम लागू किया गया है
  5. यह अधिनियम सरकार को विदेशियों को हिरासत में लेने और उनकी उपस्थिति को विनियमित करने या उन्हें भारत से निष्कासित करने का अधिकार देता है
  6. अधिनियम के प्रावधानों को हर तिमाही में फिर से अधिसूचित किया जाता है

एनएसए कब अस्तित्व में आया और इसे किसने पेश किया?

पूर्व प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी 23 सितंबर, 1980 को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम लाई थीं।

राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत हिरासत की अधिकतम अवधि क्या है?

किसी व्यक्ति को बिना किसी आरोप के 12 महीने तक हिरासत में रखा जा सकता है। उस व्यक्ति को उसके खिलाफ आरोप बताए बिना 10 दिनों के लिए रखा जा सकता है। आरोपी व्यक्ति उच्च न्यायालय के सलाहकार बोर्ड के समक्ष अपील कर सकता है लेकिन मुकदमे के दौरान वकील को अनुमति नहीं दी जाएगी।

राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम कैसे आया?

एनएसए अधिनियम 1980 की जड़ें औपनिवेशिक युग में हैं। 1818 में, बंगाल विनियमन (रेगुलेशन) III को ब्रिटिश सरकार को न्यायिक कार्यवाही का सहारा दिए बिना सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए किसी को भी गिरफ्तार करने का अधिकार देने के लिए अधिनियमित किया गया था।

1919 में, रॉलेट एक्ट ने बिना किसी मुकदमे के कारावास की अनुमति दी गई। जलियांवाला बाग त्रासदी इन रॉलेट एक्ट के विरोध का प्रत्यक्ष परिणाम थी।

स्वतंत्रता के बाद, इंदिरा गांधी ने 1971 में विवादास्पद आंतरिक सुरक्षा अधिनियम (मीसा) पेश किया, जो रॉलेट एक्ट के समान था। इसे 1977 में निरस्त कर दिया गया था, और अंततः राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) 1980 को प्रख्यापित किया गया।

एनएसए अधिनियम क्यों विवादित है?

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 22(1) कहता है कि गिरफ्तार व्यक्ति को अपनी पसंद के कानूनी व्यवसायी से परामर्श करने और बचाव करने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता है। आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 50 के अनुसार गिरफ्तार किए गए किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तारी के आधार के बारे में सूचित किया जाना चाहिए और उसे जमानत का अधिकार है।

लेकिन, राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत, हिरासत में लिए गए व्यक्ति को इनमें से कोई भी अधिकार उपलब्ध नहीं है। सरकार को जानकारी छिपाने का अधिकार है जिसे वह सार्वजनिक हित के लिए आवश्यक मानती है।

हिरासत में लिया गया व्यक्ति किसी भी कानूनी सहायता का हकदार नहीं है।

इसके अलावा, राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी), जो भारत में अपराध डेटा एकत्र करता है, एनएसए के तहत मामलों को शामिल नहीं करता है क्योंकि इसमें कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की जाती है।

राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम की आलोचना

विगत कई वर्षों से एनएसए चर्चा का मुख्य केंद्र बना हुआ है। अधिकारियों द्वारा इसके दुरुपयोग के लिए एनएसए की व्यापक आलोचना हुई है। विशेषज्ञ शांतिकाल के दौरान भी अधिनियम की वैधता को ‘अकालवाद’ (anachronism) के रूप में वर्णित करते हैं।

एक वर्ग इस तथ्य की ओर भी इशारा करता है कि सरकारें NSA को एक अतिरिक्त न्यायिक शक्ति (extra-judicial power) के रूप में उपयोग करती हैं।

राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम का हाल ही में प्रयोग

17 जनवरी, 2020 को, दिल्ली के उपराज्यपाल ने एक आदेश पारित किया जिसमें पुलिस आयुक्त को एनएसए के तहत तीन महीने की अवधि के लिए 19 जनवरी से 18 अप्रैल के बीच हिरासत में रखने की शक्ति प्रदान की गई। यह आदेश ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय राजधानी में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे थे।

जनवरी 2019 में, भाजपा के नेतृत्व वाले उत्तर प्रदेश ने कथित गौ-हत्या के मामले में एनएसए के तहत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था।

नवंबर 2018 में, मणिपुर के पत्रकार किशोर चंद्र वांगखेम को मुख्यमंत्री के खिलाफ एक फेसबुक पोस्ट के लिए NSA के तहत 12 महीने के लिए हिरासत में लिया गया था।

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