पंचायत चुनाव रीवा

पंचायत चुनाव रीवा: उम्मीदवार जनता से ऐसे मांग रहे वोट

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पंचायत चुनाव के समय में आंख खुलते ही प्रत्याशी मांग रहे वोट, कह रहे हैं – “काका हमहूं आहन उम्मीदवार, देई आशीर्वाद“। इस तरह वोटरों को रिझाने के लिए विभिन्न पदों के उम्मीदवार अजामा रहे कई तरीके।

उम्मीदवार जनता से वादा करके मांग रहे वोट

पंचायत चुनाव रीवा – उम्मीदवारों ने पांच साल तक गांव वालों की कोई खोज खबर नहीं ली, लेकिन चुनाव आया तो मतदाताओं को भगवान बना लिए हैं। प्रत्याशियों के लिए अपने पक्ष में मतदान ही सब कुछ हैं। गांव में प्रत्याशियों का अंदाज देखते ही बन रहा है।

कोई मतदाता का पैर पकड़ रहा है, तो कोई मदद के लिए एक पैर पर खड़ा दिख रहा है। यह नजारा पंचायत चुनाव के प्रचार के दौरान रीवा जिले के विभिन्न गांवों में दिख रहा।

प्रत्याशी और उनके समर्थक घर-घर जाकर जन संपर्क कर ही रहे हैं, इंटरनेट मीडिया पर भी कसर नहीं छोड़ना चाह रहे हैं। गूगल, फेसबुक और वाट्सएप पर तो चुनाव प्रचार छा गया है। इसके साथ ही प्रत्याशी सुबह शाम, रात दिन अपने क्षेत्र के मतदाता के पास आशीर्वाद मांगने के लिए पहुंच रहे है।

आंख खोलते ही उम्मीदवार व समर्थक वोटरों के घरों पर पहुँच रहे हैं। कोई कह रहा है काका हमहूं उम्मीदवार हैं, एक बार आशीर्वाद देई। वोटरों को रिझाने के लिए प्रत्याशी और कई तरह के तरीके अजमा रहे। जिले में तीन चरण में पंचायत चुनाव हो रहा है प्रत्याशियों ने अपने प्रचार के लिए मानों पैसों को पानी की तरह बहा रहें है।

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पंचायत चुनाव में पुरुषों से महिलाएं भी कम नही

वोट मांगने में पुरूषों से कम महिलाएं भी नहीं हैं। घर की महिला प्रत्याशी वोट मांगने टोलियों में निकल रही हैं। महिला प्रत्याशी टोलियों में घूम-घूम कर लोगों से वोट मांग रही है। कोई अपने लिए तो कोई अपने पति, देवर, बहू, सास, ससुर, जेठानी और नाती के लिए प्रचार कर वोट मांग रही।

रिश्ते- नाते, पड़ोसी और सभी जाति को अपना ही बिरादर बताकर वोट देने की अपील की जा रही है। मतदाताओं के रिझाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं। वोट लेने के लिए हर तरीके को अपनाया जा रहा है।

चुनाव के समय में किए जाते हैं वादे

चुनाव में वादे तो बहुत होते हैं, पर जीतने के बाद पूरे नहीं किए जाते लोगों का कहना है कि हर चुनाव में पंचायत के सर्वांगीण विकास के नाम पर मतदाताओं को दिग्भ्रमित कर लोग सत्ता पर काबिज हो जाते हैं मगर उसके बाद अपने ही निजी विकास में लग जाते हैं। लिहाजा इस बार आम मतदाता कुछ बोलने की वजह पूरी तरह खामोश है।

बताते है कि प्रत्याशी चुनाव के समय मानो जमीन पर लेटकर गिड़गिड़ा रहे हैं और कह रहे हैं की भैया हमी को वोट देना। जब वोट मांगना होता है तो न जाति देखते न धर्म लेकिन जब जीत जाते हैं तो गरीबों को पूछते तक नहीं और अपनी ही जात या धर्म के संकुचित दायरे में ही सिमट कर रह जातें है।

एक साल में ही बड़ी गाड़ी खरीद लेते है। इस बार वैसे प्रत्याशी को वोट दिया जाएगा जो पंचायत के जनता की बात सुने और विकास करें। एक बड़े समाजसेवी श्री पंकज सिंह चौहान कहते हैं कि – लोकतंत्र में जनता ही असली शासक है, चुनाव में मतदाताओं की सक्रिय भागीदारी को महत्पूर्ण बताते हुए उन्होंने इस बार पाखंडियों को वोट न देकर उनके मुंह पर घनघोर तमाचा मारने की लोगो से अपील की है।

ध्यान दें – ग्राम पंचायत चुनाव में सरपंच पद के भावी उम्मीदवार गूगल पर अपने प्रचार के लिए आज ही संपर्क करें। अपने बारे में गूगल पर लिखवाकर न केवल अपने क्षेत्र बल्कि पूरी दुनिया को अपनी पहचान बताइये।

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